बचपन में कहानियों और कथाओं का बड़ा शौक था । उस समय बाल साहित्य में सुमन सौरभ नंदन चंपक आदि यदि किताबें बेहद लोकप्रिय थी । कॉमिक्स का भी एक अपना बाजार था । कॉमिक्स में चाचा चौधरी, मामा भांजा, लंबू मोटू इत्यादि कॉमिक्स बेहद लोकप्रिय थी । हर रविवार के पंजाब केसरी का भी बेहद इंतजार रहता था क्योंकि उसमें भी एक कोना बाल साहित्य कहानियों लघु कथाओं या कॉमिक स्ट्रिप्स के लिए उपलब्ध रहता था । हम कई मित्र अपनी कॉमिक्स या या बाल साहित्य की किताबों को एक्सचेंज किया करते थे । इस तरह से हम उनका भरपूर मजा लेते थे । कोई नई किताब या कॉमिक्स बाजार में आती तो उसे खरीदने के लिए पैसों का जुगाड़ भी होता था । कभी-कभी पिताजी भी इन किताबों को पढ़ने के लिए लाया करते थे । धर्मयुग और सरिता जैसी किताबें भी घर लाया करते थे लेकिन उनमें सबसे ज्यादा मजा सिर्फ विज्ञापनों में को देखने में आता था । बाल साहित्य की किताबों की कहानियों को अपने मित्र मंडली में शेयर करने में भी आनंद आता था और उनसे सुनने में भी । घर में टीवी आने के बाद भी इन किताबों को पढ़ने में कोई अंतर नहीं आया ।
यूं तो जासूसी के धारावाहिक या कथा कहानियां मुझे बेहद पसंद है । लेकिन जासूसी कथा मैं जो सबसे ज्यादा मुझे पसंद है वह है व्योमकेश बख्शी । यह धारावाहिक के रूप में दूरदर्शन में आ...
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